छत्तीसगढ़
इंटरनैशनल मेन्स डे' के मौके पर सन नियो की लोकप्रिय अभिनेत्रियां सारा खान, काम्या पंजाबी और संगीता घोष ने बताई अल्फा मेल की परिभाषा
इंटरनेशनल मेन्स डे हर साल 19 नवंबर को कई देशों में मनाया जाता है। इस खास दिन को मनाने के पीछे का कारण पुरुषों की वेल बिंग, उनके हेल्थ और लाइफ के स्ट्रगल को जानना और उस पर बात करना है। ऐसे में चलिए जाने की इन महिलाओं की नज़र में अल्फा मेल की परिभाषा क्या है।
सन नियो के शो 'छठी मैया की बिटिया' में देवी कृतिकायेन की भूमिका निभा रही सारा खान ने कहा, "मेरे लिए एक असली अल्फा मेल वह है जो आत्मविश्वास से भरा होता है, लेकिन वह बहुत ही शांत और विनम्र होता है। उसकी ताकत दिखावे में नहीं, बल्कि दूसरों को सपोर्ट करने में है। वह सम्मानपूर्वक व्यवहार करता है, ईमानदारी की कद्र करता है और अपनी जिम्मेदारियों को समझता है। सच्ची ताकत वही है जो दयालुता और सम्मान के साथ नेतृत्व करे।"
'इश्क़ जबरिया' शो में मोहिनी का किरदार निभा रही अभिनेत्री काम्या पंजाबी ने बताया, "एक असली अल्फा मेल के पास साहस और सहानुभूति दोनों होते हैं। उसके विचार मजबूत होते हैं, लेकिन वह दूसरों के साथ करुणा और विनम्रता से पेश आता है। वह किसी पर अधिकार जताने की बजाय उन्हें सशक्त बनाता है, मुश्किलों में भी दयालु और धैर्यवान बना रहता है साथ ही सभी का सम्मान करता है। उसकी असली ताकत दूसरों को सुनने और मदद करने में है और उसमें संवेदनशीलता और अच्छाई का संतुलन होता है।"
'साझा सिंदूर' शो में सरोज की भूमिका निभा रही अभिनेत्री संगीता घोष ने कहा, "मेरे लिए असली अल्फा मेल वह है, जिसमें एक उद्देश्य और गहरी भावनात्मक बुद्धिमत्ता होती है। वह बिना अहंकार के अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ता है, ईमानदारी की कद्र करता है, और शांत नेतृत्व के जरिए लोगों को प्रेरित करता है। उसे बाहरी प्रशंसा की आवश्यकता नहीं होती; वह उदाहरण प्रस्तुत करके नेतृत्व करता है, धैर्य और सच्चे करुणा के साथ।"
'छठी मैया की बिटिया' शो में वैष्णवी (बृंदा दहल द्वारा अभिनीत किरदार) की कहानी है, जो अपनी माँ के रूप में छठी मैया को देखती है। 'इश्क़ जबरिया' गुलकी (सिद्धि शर्मा द्वारा अभिनीत किरदार) की कहानी है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करती है। 'साझा सिंदूर' शो में फूली (स्तुति विंकले द्वारा अभिनीत किरदार) की कहानी है, जिसे अपने विवाह के दिन दूल्हे के निधन के बाद अविवाहित विधवा का तमगा मिलता है।
राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण 4 दिसंबर को
स्कूलों की दक्षता बढ़ाना सुनिश्चत करें : सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने प्रदेश के स्कूलों में राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण के मद्देजर स्कूलों की दक्षता बढ़ाने के लिए गंभीरता के साथ तैयारी करने के निर्देश दिए है। गौरतलब है कि आगामी माह के 4 दिसम्बर को कक्षा 3री, 6वीं और 9वीं के विद्यार्थियों की दक्षता को राष्ट्रीय सर्वेक्षण होना है। इसके तहत केन्द्रीय स्कूल शिक्षा मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों की दक्षता का परीक्षण किया जाएगा।
शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभागीय अधिकारियों को राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण को ध्यान में रखते हुए हर स्तर पर व्यापक प्रशासनिक, प्रबंधकीय व अकादमिक तैयारी प्रारंभ करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण-2024 के आकलन कार्य के सभी जिलों में शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक तथा प्राचार्य डाइट को संयुक्त रूप से नोडल अधिकारी बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य के 99 जिला स्तरीय अधिकारी जिले में परख क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं 146 विकासखंडों में बीईओ, बीआरसीसी तथा संकुल प्राचार्य को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपते हुए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
शिक्षा सचिव श्री परदेशी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत देश भर में एक साथ होने जा रहे इस सर्वेक्षण का प्राथमिक उद्देश्य स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठचर्या रूपरेखा 2023 के साथ उच्च गुणवत्ता युक्त वैश्विक मूल्यांकन विकसित करना है। उल्लेखनीय है कि केंद्र शासन द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जा चुका है। इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में नवीन शिक्षा नीति के लक्ष्यों के अनुरूप कक्षा 3री, 6वीं और 9वीं में आधार भूत प्रारंभिक एवं मध्य चरणों के अंत में छात्रों की दक्षता का आकलन किया जा रहा है। यह सर्वेक्षण छत्तीसगढ़ के मात्र छात्र-छात्रों का नहीं बल्कि, शिक्षक, स्कूल तथा संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का मूल्याँकन सिद्ध होगा, जिसके आधार पर भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ सहित अन्य सभी राज्यों की शैक्षणिक गुणवत्ता का श्रेणी निर्धारण भी होगा ।
उन्होंने बताया कि परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण में कक्षा 3री के लिए भाषा, गणित एवं हमारे आसपास की दुनिया से 90 मिनट में 45 प्रश्न पूछे जाएँगे। कक्षा 6वीं के लिए उक्त विषयों से संबंधित 51 प्रश्न 90 मिनट में पूछे जाएँगे। कक्षा 9वीं में भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान के 60 प्रश्न 120 मिनट पर हल करने होंगे। परीक्षार्थियों को एक ही प्रश्न पत्र दिया जायेगा। परख मूल्याँकन माइनस मार्किंग नहीं होगी। केंद्र सरकार के नियमानुसार जिस माध्यम की शाला चयनित की गई, उस माध्यम की प्रथम भाषा पर सर्वे अर्थात् प्रश्नपत्र होगा । यदि अंग्रेजी माध्यम की कई शाला सेम्पल शाला के रूप में चयनित की जाती हैं, तो वहाँ अंग्रेजी भाषा में आकलन परीक्षा निर्धारित होगी ।
राज्य में परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के लिए सेंपल शालाओं के रूप में जिले की शासकीय सहित राज्य शासन से अनुदान प्राप्त शालाओं, गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय शालाओं, केंद्रीय, नवोदय विद्यालयों को सीधे भारत शासन, स्कूल शिक्षा वि नई दिल्ली द्वारा चयनित व निर्धारण किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 33 जिलों में कुल 3420 को चुना गया है। इस मूल्याँकन सर्वेक्षण या परीक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मूल्याँकन कार्य की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के शासकीय या अशासकीय किसी भी शिक्षक को परीक्षक या पर्यवेक्षक के रूप में कार्य में नियुक्त नहीं किया जायेगा, बल्कि परीक्षा का मूलभूत कार्य राज्य के शासकीय डाइट कालेज में छात्राध्यापक या प्रशिक्षु शिक्षक अर्थात् अध्यनरत डीएलएड, बीएड एवं एमएड के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा संपन्न कराया जायेगा ।
विशेष परिस्थिति में शासकीय कॉलेज के विद्यार्थी, अशासकीय प्रशिक्षण संस्थाओं के डीएलएड, बीएड, एमएड प्रशिक्षणार्थियों को लिया जा सकेगा। परीक्षा कार्य संपन्न कराने वाले ऐसे लगभग 3800 छात्राध्यापकों को जिले के 33 डाइट के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे सुचारू पूर्वक परीक्षा कार्य बिना बाधा के पूरा करा सकें। इस सर्वेक्षण के पारदर्शी क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार द्वारा सीबीएसई के प्रशासनिक व अकादमिक अमले को ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्त किया गया है जो प्रत्येक निर्धारित परीक्षा केंद्र में मानटरिंग करेंगे।
राज्य के विद्यार्थी अपनी शैक्षिक दक्षता का राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें इसके लिए परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण की पूर्व तैयारी के रूप में एससीईआरटी तथा समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्या द्वारा राज्य के सभी स्कूलों के कक्षा 3री, 6वीं तथा 9वीं के विद्यार्थियों को प्रश्न बैंक एवं रीडिंग कार्ड उपलब्ध कराया गया है। उनके लिए विशेष तौर पर सभी निजी व सरकारी स्कूलों में मॉक टेस्ट का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस कार्य में राज्य के लगभग 146 निजी शिक्षा महाविद्यालयों के 19 हजार छात्र अध्यापकों का भी स्वैच्छिक सहयोग लिया जा रहा है।
गिद्ध संरक्षण पर कार्यशाला
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया के विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
गिद्ध संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा इस कार्यक्रम में शोधकर्ता, छात्र, और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एकत्रित हुए, जहां गिद्ध संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। कार्यशाला में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के विशेषज्ञों ने गिद्धों की वर्तमान स्थिति, उनकी संख्या में गिरावट के कारण और उनके लिए सकारात्मक वातावरण बनाने के उपायों पर चर्चा की।
शोधकर्ताओं और छात्रों ने गिद्ध संरक्षण के महत्व और उससे संबंधित चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में न केवल गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि सभी प्रतिभागियों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया। शोधकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ में गिद्धों की गणना से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए। इंद्रावती टाइगर रिजर्व और अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रयासों को विशेष रूप से सराहा गया, जहां गिद्ध संरक्षण के लिए वल्चर रेस्टोरेंट और वल्चर सेफ जोन जैसी पहल की जा रही हैं। वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री प्रेम कुमार ने कहा कि गिद्ध संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग नागरिकों की भावनाओं को गिद्धों से जोड़ने का प्रयास करेगा, जिससे वे इनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनें। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में व्हाईट रम्पड वल्चर को पुनः बसाने के प्रयास किए जाएंगे। इसी तरह वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेगा, ताकि पालतू जानवरों के उपचार के दौरान उपयोग किए जाने वाले घातक दवाईयों पर प्रतिबंध लगाया जा सके।
इसी तरह स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रकृति और गिद्ध संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए वन विभाग एनजीओ, शोधकर्ताओं और अन्य संबंधित संगठनों के साथ समन्वय करेगा। गिद्धों के आवास और उनकी गतिविधियों को समझने के लिए एक निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी और उनका जियोटैगिंग किया जाएगा।
इस कार्यशाला में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री आर. के. सिंह, सहायक प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना एवं विकास श्री अरुण कुमार, सीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं फील्ड डायरेक्टर, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व श्रीमती सातोविषा समझदार, संचालक, जंगल सफारी रायपुर श्री धम्मशील गणवीर, उप निदेशक, अचानकमार टाइगर रिजर्व श्री यू. आर. गणेश, उप निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व श्री संदीप बालगा और डीएफओ, कवर्धा श्री शशि कुमार उपस्थित रहे।
पैनल चर्चा में शोधार्थी डॉ. विभू प्रकाश, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया डॉ. सुरेश कुमार, श्री क्रिस्टोफर बाउडेन, डॉ. काजवीन उमरीगर श्री शेखर कोलिपाका और श्री दिलशेर खान ने अपने अनुभव साझा किए और गिद्ध संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
श्रमवीर हमारे प्रदेश के रीड़ की हड्डी, इनके निरंतर श्रम से ही हमारा राज्य प्रगतिशील : श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन
46 करोड़ 60 लाख 53 हजार 993 रूपए डीबीटी के माध्यम से 85,026 श्रमिक हितग्राहियों के खाते में हुई अंतरित
श्रमेव जयते पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 0771-3505050 से लाभ उठाने की अपील की
कोरबा में प्रदेश स्तरीय वृहद श्रमिका सम्मेलन का किया गया आयोजन
छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य उद्योग व श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन की मुख्य आतिथ्य में कोरबा शहर के प्रियदर्शिनी इंदिरा स्टेडियम परिसर में प्रदेश स्तरीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल, असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं श्रम कल्याण मंडल अंतर्गत संचालित 17 विभिन्न योजनाओं के 85,026 श्रमिक हितग्राहियों को 46 करोड़ 60 लाख 53 हजार 993 रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में सीधे अंतरित की गई।
श्रम मंत्री श्री देवांगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमवीर हमारे प्रदेश के रीड़ की हड्डी है, इनके निरंतर श्रम से ही हमारा राज्य प्रगतिशील है। उन्होंने कहा कि श्रमवीरों के सच्चे सम्मान के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में श्रमिकों के हित में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की गई है। जिनके बेहतर क्रियान्वयन से श्रमिक को लाभ मिल रहा है। कैबिनेट मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी वर्ग के हितों के विकास के दृढ़ संकल्पित है। राज्य सरकार द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में सुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। अब सरकार एवं श्रमिकों के बीच कोई बिचौलिया नहीं रह गया है। श्रमिकों को उनके हित की राशि अब सीधे उनके बैंक खातों में मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर विभिन्न योजनांतर्गत 235 करोड़ की सहायता राशि श्रमिकों को प्रदान की गई थी। अनेक सामग्री का वितरण भी किया गया था। आज भी श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी गई है। जिसका सीधा लाभ श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को मिलेगा।
मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि कोरबा श्रमिक बाहुल्य जिला है। यहां बाल्को, एनटीपीसी एसईसीएल जैसे अनेक संयंत्र स्थापित है। जहां कार्य करने वाले श्रमिकों की बहुलता है। इन मेहनतकश श्रमिकों के हित में वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित है। जहां श्रमिकों को 5 रुपए में भरपेट भोजन मिलता है। इसे पूरे राज्य में संचालित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग अंतर्गत लागू नई औद्योगिक नीति में अनुदान की व्यवस्था से बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। श्रम मंत्री ने सम्मेलन में पड़ोसी जिलों से आए श्रमिकों का अभिवादन करते हुए कहा कि आप सभी को विभागीय योजनाओं से लाभांवित करने के लिए शिविर का आयोजन किया गया है, आप सभी इसका लाभ उठाएं। साथ ही विभागीय प्रदर्शनी में जाकर शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें एवं योजनाओं से जुड़कर लाभ लें। उन्होंने बताया कि श्रमिकों की समस्या-शिकायतों के समाधान एवं सहायता के लिए श्रमेव जयते पोर्टल लागू की गई है। जिसका हेल्पलाइन नंबर 0771-3505050 है। उन्होंने श्रमिकों से हेल्पलाइन नंबर साझा करते हुए कहा कि आपकी समस्या व शिकायतों का इसके माध्यम से समाधान किया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक कटघोरा श्री प्रेमचंद पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि में श्रमिकों का योगदान अहम है। उनके बिना विकास की परिकल्पना भी संभव नही है। उन्होंने कहा कि श्रमवीरों एवं उनके परिवार के हित में सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की गई है। उन्होंने श्रमिकों को इन योजनाओं की जानकारी रखने एवं उनका लाभ उठाने के किये कहा।
प्रभारी सचिव श्रीमती मंगई डी ने कहा कि देश की तरक्की में श्रमिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उनके सहयोग के बिना विकास की धुरी थम जाएगी। श्रम वीरों के कल्याण के लिए विभाग द्वारा अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। जिसका उन्हें लाभ दिलाने जिला प्रशासन द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रभारी सचिव ने कहा कि कोरबा से उनका पुराना रिश्ता रहा है। उनके शासकीय सेवा की शुरुआत कोरबा जिले से हुई है। वह यहां सहायक कलेक्टर व मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के रूप में अपनी सेवा दे चुकी है। आज लगभग 15 वर्ष बाद पुनः कोरबा आकर प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने बताया कि श्रमिक परिवार के मेधावी बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना प्रारम्भ की गई है। जहां ऐसे परिवार के मेधावी छात्रों का प्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क अध्ययन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को अनेक योजनाओं का लाभ दिलाने शिविर लगाई गई है। जहां उनका श्रमिक पंजीयन, स्वास्थ्य जांच कर निःशुल्क दवाई वितरण भी किया जा रहा है। उन्होंने सभी से शिविरों का लाभ लेने का आग्रह किया।
कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने कहा कि उर्जाधानी कोरबा में माइंस एवं संयंत्र दोनों संचालित है। जहां बड़ी संख्या में श्रमिक जीविकोपार्जन करते है। राज्य शासन के मंशानुसार श्रमिक परिवारों को लाभान्वित करने हेतु श्रम विभाग की सभी योजनाओं का प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर लोगों तक पहुंचाने जिला प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर कार्य किया जा रहा है। जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। सम्मेलन को नेता प्रतिपक्ष नगर पालिक निगम श्री हितानंद अग्रवाल, पार्षद श्री नरेंद्र देवांगन ने भी संबोधित किया और योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
स्टॉल के माध्यम से योजनाओं की दी गई जानकारी -
सम्मेलन स्थल पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत पंजीकृत श्रमिको हेतु संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाया गया था। जिसमे स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाई वितरण, कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के तहत लागू स्कीम, श्रम पंजीयन, प्रधानमंत्री आवास, महतारी जतन, दिव्यांग सहायता, बच्चों हेतु छात्रवृत्ति जैसे अन्य योजनाओं की जानकारी देकर श्रमिको को लाभांवित किया गया। स्थल पर जनसंपर्क विभाग द्वारा छायाचित्र प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। विभाग द्वारा शासन की योजनाओं पर आधारित जनमन, सुशासन के नवीन आयाम, उदित छत्तीसगढ़, रोजगार नियोजन जैसे अनेक पत्रिकाओं, ब्रोसर पाम्पलेट का वितरण भी किया गया।
मंत्री श्री केदार कश्यप ने 67.17 करोड़ रूपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में बस्तर क्षेत्र सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों में अधोसंरचनात्मक विकास हो रही है। राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी कड़ी में वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने नारायणपुर जिले में 67 करोड़ 17 लाख रूपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया। इनमें 2 करोड़ 12 लाख रूपये का लोकार्पण एवं 65 करोड़ 5 लाख रूपये का भूमिपूजन कार्य शामिल हैं।
मंत्री श्री कश्यप ने इस मौके पर राहत शिविर भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 50 लाख रूपये, शबरी एम्पोरियम का नवीनीकरण कार्य हेतु 24 लाख 52 हजार रूपये, कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय 100 सीटर हेतु 37 लाख 70 हजार रूपये से निर्मित भवनों का लोकार्पण किया।
उन्होंने इसी प्रकार कस्तुरमेटा से इकपाड़ सड़क निर्माण हेतु 2 करोड़ 19 लाख 94 हजार रूपये, कस्तुरमेटा कुतुल रोड से तोके सड़क निर्माण हेतु 10 करोड़ 32 लाख 38 हजार रूपये, सोनपुर मसपुर रोड से तुमेरादि सड़क निर्माण हेतु 14 करोड़ 58 लाख 98 हजार रूपये, सोनपुर से ऐहनार सड़क निर्माण हेतु 4 करोड़ 32 लाख 60 हजार रूपये, कड़ेमेटा से कोडोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 78 लाख 64 हजार रूपये और कस्तुरमेटा से मकसोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 67 लाख 41 हजार रूपये से निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया।
विश्व पर्यटन मानचित्र में बस्तर के धुड़मारास गांव ने बनाई अपनी जगह संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित हुआ ग्राम धुड़मारास
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के छोटे से गांव धुड़मारास ने देश और दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाई है। बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन ग्राम उन्नयन कार्यक्रम के लिए 60 देशों से चयनित 20 गांवों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के धुड़मारास ने भी अपनी जगह बनाई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए पर्यटन विभाग की टीम के साथ ही बस्तर जिला प्रशासन तथा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धुड़मारास की सफलता का मुख्य श्रेय यहां के स्थानीय निवासियों को जाता है, जिन्होंने अपने पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों को संरक्षित रखते हुए इसे आकर्षक पर्यटक स्थल में बदल दिया है। धुड़मारास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर के अदभुत आदिवासी जीवनशैली, पारम्परिक व्यंजन, हरियाली और जैव विविधता से समृद्ध यह गांव पर्यटकों के लिए एक आकर्षक ही नहीं बल्कि रोमांचक स्थल है।
धुड़मारास गांव दुनिया भर के उन 20 गांवों में से एक है जिसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव उन्नयन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुना गया है। धुड़मारास को इसकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संुदरता और सतत पर्यटन विकास की क्षमता के कारण चुना गया है। उन्नयन कार्यक्रम में शामिल होने से गांव को उन संसाधनों तक पहंुंच प्राप्त होगी जो इसके पर्यटन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, सांस्कृतिक संपत्तियों को बढ़ावा देने और ग्रामवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार में मदद करेंगे। विश्व स्तर पर पर्यटन गांव के रूप में इस गांव की पहचान स्थापित होने का तात्पर्य यह भी है कि लंबे समय के बाद बस्तर में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उल्लेखनीय है कि धुड़मारास तथा बस्तर के ही चित्रकोट गांव को इस वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला था।
प्रकृति की गोद में बसा धुड़मारास गांव घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के बीच से बहती कांगेर नदी इसे मनमोहक बना देती है। बस्तर के लोग मेहमाननवाजी के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करवा रहे हैं, ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाने से उन्हें रोजगार मिल रहा है। गांव के युवा पर्यटकों को आसपास के क्षेत्रों की सैर कराते हैं। स्थानीय खानपान के अंतर्गत पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए ट्रैकिंग ट्रेल और कैंपिंग साइट विकसित करने सहित होम-स्टे की सुलभता हेतु पहल कर रही है। साथ ही स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को प्रोत्साहन दे रही है, जिससे ईलाके के रहवासी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता होने के साथ आय संवृद्धि हो सके। राज्य सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु क्षेत्र में सड़कों और परिवहन सुविधाओं का विकास पर भी ध्यान दे रही है। बस्तर के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में देश के पर्यटकों सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए व्यापक प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। वहीं स्थानीय हस्तशिल्प और कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यटन विभाग ने धुड़मारास को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जिले के नागलसर और नेतानार में भी स्थानीय युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति द्वारा गांव में बहने वाली शबरी एवं कांगेर नदी में कयाकिंग एवं बम्बू राफ्टिंग की सुविधा पर्यटकों को मुहैया कराई जा रही है। साथ ही स्थानीय व्यंजन से पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक खान-पान का स्वाद मिल रहा है।
गांव के युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति कांगेर नदी में कयाकिंग और बम्बू राफ्टिंग की सुविधाएं पर्यटकों को उपलब्ध करवाती है, जिससे इस समिति को अच्छी आमदनी हो रही है। यह पर्यटन समिति अब अपनी आय से गांव में पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं।
बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास की कहानी यह साबित करती है कि जब सामुदायिक भागीदारी और शासन का सहयोग मिलता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक और सांस्कृतिक विकास संभव है। यह गांव अब बस्तर के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है। यही वजह है कि कांगेर घाटी नेशनल पार्क के नागलसर और नेतानार में भी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।
गुरुनानक देव जी ने दिया समतामूलक समाज के निर्माण पर जोर- मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री गुरुनानक जयंती के अवसर पर आयोजित प्रकाशपर्व में हुए शामिल
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के खालसा स्कूल प्रांगण में गुरुनानक जयंती के अवसर पर आयोजित प्रकाश पर्व में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कीर्तन दरबार में मत्था टेका और सभी छत्तीसगढ़ वासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रकाश पर्व पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि आज इस पवित्र दिन सिख समुदाय के अपने भाइयों-बहनों के बीच आकर मैं बहुत खुशी का अनुभव कर रहा हूँ। गुरु नानक देव जी का जीवन न केवल सिख समुदाय के लिए प्रेरक है अपितु सभी भारतीयों के लिए उनका जीवन प्रेरणादायी है। गुरु नानक जी के वचनों में सामाजिक एकता पर जोर दिया गया है। उन्होंने एक समतामूलक समाज के निर्माण पर जोर दिया। देश की आज़ादी में सिख समाज का बहुत बड़ा योगदान है। सिख समाज का इतिहास बहुत ही गौरवशाली और समृद्ध है। धर्म के प्रति समर्पण और सेवा की भावना सिख समाज की अभिन्न पहचान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब हम गुरु गोविंदसिंह जी का जीवन देखते हैं तो हमें पता चलता है कि उनके पुत्र साहेबजादे बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी पर धर्म बदलने का दबाव आया। उन्होंने शहादत कबूल की लेकिन धर्म नहीं बदला। ऐसा इतिहास सिख समाज का रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने साहेबजादों के शहादत दिवस 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया और हर साल हम गर्व के साथ यह दिन मनाते हैं।
इस अवसर पर विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, श्री संजय श्रीवास्तव, श्री भूपेंद्र सवन्नी, श्री मनमोहन चावला व गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने किया जननायकों के अमूल्य योगदान पर आधारित शौर्याजंलि कैलेण्डर और एटलस का विमोचन
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय जननायकों के अमूल्य योगदान पर आधारित शौर्याजंलि कैलेण्डर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने वन अधिकारों की मान्यता से सम्बंधित एटलस पुस्तक का भी विमोचन किया।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय जननायकों ने अमूल्य योगदान देकर और मां भारती के चरणों में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देश को आजाद कराया। आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे सेनानियों को नमन करने के साथ ही शौर्याजंलि कैलेण्डर के माध्यम से स्मरण के लिए यह कैलेण्डर प्रकाशित कराया है। विभाग द्वारा जनजातीय जननायकों को भगवान बिरसा मुंडा के 150 वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर उनके जन्म दिवस और बलिदान दिवस को स्मरण करते हुए नमन करने का प्रयास किया है।
जनजातीय जननायकों के अमूल्य योगदान पर आधारित शौर्याजंलि कैलेण्डर विमोचन के अवसर पर आदिवासी विकास विभाग के भार साधक मंत्री श्री राम विचार नेताम, राज्यसभा सदस्य श्री अरुण सिंह, विधायक सर्व श्री पुरंदर मिश्रा, श्री अनुज शर्मा, श्री मोती लाल साहू, श्री विकास मरकाम, प्रमुख सचिव आदिवासी विकास श्री सोनमणि बोरा, संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी दयानन्द, आयुक्त श्री नरेंद्र दुग्गे, कमिश्नर रायपुर महादेव कावरे सहित आदिवासी समुदाय के लोग और बड़ी संख्या में कलाकार गण उपस्थित थे।
जशपुर के मुंडारी नर्तक दल के कलाकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
हाथी प्रभावित इलाके से आए कलाकारों ने गांव में स्ट्रीट लाइट लगवाने का किया आग्रह : मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी
राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस में अपनी कला का प्रदर्शन करने आए जशपुर जिले के मुंडारी नृत्य दल के कलाकारों ने आज रात यहां मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि राजधानी के मुख्य समारोह में अपनी कला का प्रदर्शन करके उनके दल के सदस्य काफी उत्साहित हैं। उन्होंने इस आयोजन के माध्यम से मिले अवसर के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।
मुख्यमंत्री ने इन कलाकारों से इनके गांव का हालचाल भी पूछा, जिसके जवाब में दल के सदस्यों ने बताया कि वे लोग बादलखोल अभ्यारण्य के बगीचा विकासखंड की ग्राम पंचायत बछरांव के निवासी हैं। यहां मुड़ा, नगेशिया, पहाड़ी कोरवा और उरांव जनजाति के परिवार निवासरत हैं। यह क्षेत्र हाथी प्रभावित है। तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में इन लोगों ने सात स्ट्रीट लाइट की मांग मुख्यमंत्री से की। मुख्यमंत्री ने उन्हें स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए आश्वस्त किया।
लोक कलाकारों के इस दल में प्रतिभा मुंडा, मीना मुंडा, शांता, विष्णु बरला, रामदयाल, सुनीता, अनुराधा, अमिता बरला, विष्णु मांझी और विश्वनाथ प्रधान आदि शामिल थे।
दो दिवसीय रीजनल रूरल वर्कशॉप का समापन
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आयोजित दो दिवसीय रीजनल रूरल वर्कशॉप का बरदिहा लेक गंगरेल में समापन हुआ। इस अवसर पर मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट के अधिकारी गया प्रसाद, संचालक पीएम आवास रजत बंसल, कलेक्टर सुश्री नम्रता गाध्ां, सीईओ जिला पंचायत सुश्री रोमा श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
समापन अवसर पर गयाप्रसाद ने संबोधित करते हुए कहा कि देश में बदलाव की लहर चल रही है। गांव के बदलते स्वरूप में प्रधानमंत्री आवास योजना किस प्रकार सहायता की है, यह दिखाई देता है। मानव की आधारभूत आवश्यकता को पूरा करने में भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि जब मैं किसी हितग्राही के आवास को देखने जाता हूं तक उनसे यह नहीं पूछता कि कितनी लागत आई, कितनी मेहनत लगी यह नहीं पूछता, बल्कि यह पूछता हूं कि आवास बनने से आपके जीवन में क्या बदलाव आया है। आदिवासी क्षेत्रों के विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता देने का प्रावधान है। जिन हितग्राहियों का आवास स्वीकृत हो चुका है, उन्हें बधाई और जिन्हें नहीं मिला, उनका भी सर्वे कराकर शीघ्र आवास स्वीकृत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले की विषम भौगोलिक परिस्थिति के मद्देनजर ऑनलाईन सर्वे एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। इसके लिए हमने ऑफलाईन सर्वे का भी निर्णय लिया है। उन्होंने आगे कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में इतनी सुंदर और आकर्षक आंगनबाड़ी बनाने पर जिला प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी ना सिर्फ बच्चों को शिक्षा देती है, बल्कि नई पीढ़ी को मजबूत भी बनाती है।
इस अवसर पर आशीष शिंदे ज्वाइंट डायरेक्टर एमओआरडी ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यशाला का इससे बेहतर समापन नहीं हो सकता था। कार्यशाला के पहले दिन हमने बंद कमरे में बैठकर योजना क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया। दूसरे दिन हमने धमतरी जिले के दूरस्थ नगरी विकासखण्ड के पीपरहीभर्री और कल्लेमेटा में विशेष पिछड़ी जनजातियों कमारों के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाए गए आवासों का निरीक्षण किया। जिसमें गुणवत्ता, मनरेगा के तहत मजदूरी, स्वीकृत राशि और आवास योजना का लोगो को प्रदर्शित करने के तरीके को सराहा। वहीं उत्तरप्रदेश से पहुंचे अजीत कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं, जिसके लिए बधाई के पात्र हैं। शासन द्वारा आवास योजना को बहुत ही सरल व सहज बनाया गया है।
इस अवसर पर कलेक्टर सुश्री नम्रता गांधी ने कहा कि आगंतुक अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि जिले के विकास कार्यों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। उन्होंने हर पात्र जरूरतमंद को आवास मिल सके, यह हमारा प्रयास रहेगा। आपके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर हम और बेहतर कार्य कर सकें, यह हमारी कोशिश रहेगी। सीईओ जिला पंचायत सुश्री रोमा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों ने कलश में जल अर्पित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके साथ ही महानदी जलाशय में अंटार्किटिका सी वर्ल्ड गंगरेल डेम में अधिकारियों ने बोटिंग की।
पॉम ऑयल से बना रहे थे नकली पनीर, फैक्ट्री सील
दुर्ग में नकली पनीर बनाने की एक फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। इस फैक्ट्री में पॉम ऑयल और दूध पाइउडर के साथ एसेंस का इस्तेमाल कर न सिर्फ पनीर बनाया जा रहा था, बल्कि प्रदेश के कई शहरों में इसे बड़ी मात्रा में खपाया जा रहा था। इस फैक्ट्री को लेकर दुर्ग कलेक्टर के साथ ही सांसद विजय बघेल को भी फोन कर पूरी जानकारी दी। जिसके बाद SDM, तहसीलदार के साथ ही कुम्हारी थाना की टीम भी मौके पर पहुंचकर अब इस फैक्ट्री को सील कर दिया है। और अब फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम पनीर का सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजने की तैयारी कर रही है।
नकली पनीर के बारे में तो आपने भी बहुत सुना होगा। लेकिन इसे कैसे बनाया जाता है। इस खुलासा हुआ है दुर्ग जिले के कुम्हारी अहिवारा मार्ग में यह फैक्ट्री लंबे समय से संचालित थी। एक जिसकी भनक प्रशासन के अधिकारियो को भी नही थी। इस फैक्ट्री के अंदर तो दूध का दूध नही था और पनीर का पनीर बड़ी मात्रा में था। उसे भी पॉम ऑयल और दूध पावडर से बनाया जा रहा था।
इस फैक्ट्री में पनीर बनाने के लिए एक प्लास्टिक के ड्रम में बड़े मथनी से मिलावट की गई सामग्री को मथा जा रहा था।इसके बाद बड़े बड़े कंटेनर में उसे रखकर हीट किया जा रहा था। टीन के शेड में संचालित इस फैक्ट्री में स्किम्ड मिल्क पाउडर, तेल और पॉम ऑयल से बड़ी मात्रा नकली पनीर बनया जा रहा था। इस नकली पनीर फैक्ट्री के संबंध में जिला प्रशासन को दी गई। जिसके बाद एसडीएम महेश राजपूत अपने टीम के साथ कुम्हारी थाना के स्टॉफ ने फैक्ट्री पहुंचकर नकली पनीर फैक्ट्री का निरीक्षण किया गाय।फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।पनीर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि स्किम्ड मिल्क पाउडर, पॉम ऑयल,तेल और केमिकल मिलकर पनीर तैयार किया जाता है इस फैक्ट्री में प्रतिदिन 100 से 150 किलो पनीर तैयार किया जाता है जिससे रायपुर,दुर्ग समेत अन्य जिलों में सप्लाई की जताई है।
जनता को चेतावनी
प्रशासन ने जनता को सतर्क रहने की अपील की है। नकली पनीर के सेवन से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है। यदि किसी को ऐसी गतिविधियों की जानकारी हो, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें। इस कार्रवाई के बाद जिले में नकली खाद्य सामग्री के खिलाफ प्रशासनिक मुहिम को लेकर नागरिकों ने संतोष जताया है।
सादगी की प्रतिमूर्ति और सिद्धांत के पक्के व्यक्ति थे स्व. श्री श्रीगोपाल व्यास-मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज सभागार में राज्यसभा के पूर्व सांसद एवं प्रख्यात समाज सेवी स्व. श्री श्रीगोपाल व्यास की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. श्री श्रीगोपाल व्यास सादगी की प्रतिमूर्ति और अपने सिद्धांत के पक्के व्यक्ति थे। उनका निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्व. श्री श्रीगोपाल व्यास के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धाजंलि सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि अंतिम बार मुझे केन्द्रीय मंत्री श्री जेपी नड्डा के साथ उनके निवास पर जाने का मौका मिला। वहां श्री श्रीगोपाल व्यास जी से मुलाकात हुई। जब हम उनसे मिलने पहुंचे तो 90 वर्ष की आयु में भी वे अत्यंत गर्मजोशी से हम लोगों से मिले। यह उनकी आत्मीयता को दर्शाता है। बचपन से मैं उनके विषय में सुना करता था। कुनकुरी के पंडित देवकी महाराज के साथ श्री श्रीगोपाल व्यास मीसाबंदी रहे। मैं अक्सर जेल का अनुभव उनसे पूछता था। वे श्री श्रीगोपाल की सादगी के बारे में बताते थे। जब मैं सांसद बना, तब श्री श्रीगोपाल व्यास जी से प्रत्यक्ष मिलने का सौभाग्य मिला। उनसे मिलकर एहसास हुआ कि जो कुछ उनके विषय में सुना था, वो शत-प्रतिशत सही था। वे सादगी की प्रतिमूर्ति थे। सादा जीवन उच्च विचार की पंक्तियां उनके लिए सटीक हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जब मैं केंद्रीय मंत्री था, तब श्री श्रीगोपाल व्यास राज्यसभा सांसद थे। उस समय मुझे उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिला। वे अपने जेल के अनुभव मुझे बताते थे। श्री श्रीगोपाल व्यास जी सिद्धांतवादी और उसूलों के पक्के व्यक्ति थे। वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत में विश्वास रखते थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक बार दिल्ली के व्यापार मेला में हम दोनों को साथ में छत्तीसगढ़ के स्टॉल के उद्घाटन कार्यक्रम में जाने का मौका मिला। वे उद्घाटन पर फीता काटने से मना करते थे। उनका विचार था कि हम जोड़ने वाले लोग हैं काटने वाले नहीं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर स्व. श्री श्रीगोपाल व्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से शोकसंतप्त परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि श्री व्यास का जीवन देखकर नहीं लगता था कि वे गृहस्थ जीवन जी रहे थे। उन्होंने सन्त की तरह जीवन जीया। राज्यसभा सदस्य रहते हुए भी वे सामान्य जीवन जीते थे। वे हर कार्यकर्ता की चिंता करते थे। बड़े दायित्व में रहते हुए वे सामान्य रूप से रहते थे। उन्होंने कभी किसी की सहायता नहीं ली। उनके जीवन से कर्त्तव्य के प्रति समर्पण और देशसेवा की सीख मिलती है। वे अंतिम समय तक सक्रिय रहे और उन्होंने अहर्निश सेवा का कार्य किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी, वनमंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, सांसद तोखन साहू, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, विधायक व पूर्व मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक गुरू खुशवंत साहेब, विधायक श्री संपत अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व विधायक श्री अरुण वोरा सहित स्व. श्री श्रीगोपाल व्यास के परिजन व बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी महापर्व का शुभारंभ
पहले दिन प्रदेश में 55 हजार मीट्रिक टन धान की हुई खरीदी
प्रदेश में आज खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरूआत हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बालोद जिले के भांठागांव (बी) धान खरीदी केन्द्र से प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का शुभारंभ किया। धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आज पहले दिन लगभग 55 हजार टन धान की खरीदी हुई है। आज 14562 किसानों ने धान बेंचा है। इसी के साथ धान खरीदी का सिलसिला शुरू हो गया है। राज्य सरकार इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस खरीफ वर्ष के लिए 27.68 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.42 लाख नए किसान शामिल है। आज दिनांक के लिए कुल 24 हजार 748 टोकन जारी किए गए थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में किसानों ने भांठागांव (बी) खरीदी केन्द्र में बेचा अपना धान
सहकारी बैंक मोहंदीपाट की नवनिर्मित भवन का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर किसानों से प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का शुभारंभ बालोद जिले के भांठागांव (बी) धान खरीदी केन्द्र से किया। इसी के साथ आज 14 नवम्बर राज्य में किसानों से धान खरीदी की शुरूआत हो गई है, जो 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने भांठागांव (बी) उपार्जन केन्द्र पहुंचने के बाद इलेक्ट्रॉनिक तौल एवं अन्य यंत्रों का पूजन और वहां उपस्थित किसानों को माला पहना कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने किसान भाईयों को धान खरीदी महापर्व के शुभारंभ की बधाई और शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ग्राम भांठागांव के किसान श्री भागबली ने कुल 148 क्विंटल और श्री हरिराम ने 65 क्विंटल 20 किलो धान की बिक्री की। मुख्यमंत्री के समक्ष अपने धान की बिक्री का अवसर प्राप्त होने से किसान भागबली और हरिराम बहुत ही खुश नजर आ रहे थे। उक्त उपार्जन केन्द्र में 14 नवम्बर को धान खरीदी हेतु कुल 06 किसानों का टोकन काटा गया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम मोहंदीपाट में 30 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित जिला सेवा सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा मर्यादित दुर्ग के नवीन शाखा भवन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इससे पूर्व छत्तीसगढ़ महतारी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम स्थल में मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद बिरसा मुंडा एवं गहिरा गुरु के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक होगी। किसानों को उनके द्वारा बेचे गए धान के एवज में राज्य शासन द्वारा 72 घंटे भीतर उनके बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में धान खरीदी के लिए 2,739 स्थापित किए गए हैं। इस साल धान बेचने के लिए 27,01,109 पंजीकृत किसानों द्वारा बोये गए धान का कुल रकबा 34,51,729 हेक्टेयर है। पंजीकृत किसानों में 1,35,891 नये किसान हैं।
कार्यक्रम में सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोनादेवी देशलहरा, पूर्व विधायक श्री बीरेंद्र साहू एवं श्री राजेंद्र राय, कंवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री हरबंश मिरी, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री पवन साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री देवलाल ठाकुर, कंवर समाज के जिला अध्यक्ष श्री केश कुमार ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधियो एवं विभिन्न समाज के पदाधिकारी, किसान एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ का स्टॉल इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र
14 से 27 नवंबर तक होगा आयोजन
नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ का स्टॉल इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां ढोकरा कला, कोसा सिल्क, बस्तर के बांस शिल्प और अन्य पारंपरिक शिल्पों की झलक देखने को मिलती है। इसके साथ ही, राज्य ने अपने औद्योगिक उत्पादों, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और हर्बल उत्पादों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया है। इस वर्ष की थीम “विकसित भारत @ 2047” को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ ने अपने स्टॉल को तैयार किया है। राज्य ने हाल के वर्षों में अपने आदिवासी क्षेत्रों के विकास, रोजगार सृजन, और औद्योगिक निवेश में उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य ने एक मजबूत औद्योगिक और सामाजिक आधार तैयार किया है, जिसने देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित किया है।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 43वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 14 नवंबर से प्रारंभ हो गया है। इस वर्ष मेले की थीम “विकसित भारत @ 2047” है, जिसमें देश के सभी राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेश अपनी प्रगति और उपलब्धियों को प्रदर्शित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ भवन की आवासीय आयुक्त श्रीमती श्रुति सिंह ने छत्तीसगढ़ के पवेलियन का उद्घाटन किया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ से आए कलाकारों ने करमा नृत्य की प्रस्तुति दी। ‘विकसित छत्तीसगढ़@2047' की अवधारणा पर छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग, स्वयं सहायता समूह, हैंडलूम, हस्तशिल्प, हर्बल, कृषि विभाग आदि के स्टॉल लगाए गए हैं। 20 नवंबर को राज्य सांस्कृतिक दिवस मनाया जाएगा जहां लोक कलाकार प्रदेश की समृद्ध लोक कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे।
पूरी पारदर्शिता के साथ करें धान खरीदी का कार्य : मंत्री श्री दयालदास बघेल
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया
प्रभारी मंत्री श्री बघेल ने सूरजपुर में विभागीय कामकाज की समीक्षा की
खाद्य मंत्री एवं सूरजपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आज संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर शासन के योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों द्वारा अपने विभागों के द्वारा शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की अद्यतन से मंत्री श्री बघेल को अवगत कराया। इस दौरान मंत्री श्री बघेल ने धान खरीदी में गड़बड़ी को रोकने एवं पूरी पारदर्शिता के साथ धान खरीदी का कार्य करने सख्त निर्देश दिए। इस अवसर पर मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मंत्री श्री बघेल ने जिले में धान खरीदी के सम्बन्ध में जानकारी लेते हुए बारदाने की उपलब्धता, खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन को लेकर तैयारी एवम किसानों को दी जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इसके अलावा राशन दूकानों के माध्यम से चावल आबंटन की स्थिति, किसानों के पंजीयन, धान उपार्जन एवम मिलिंग प्लान, पीएम उज्ज्वला, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना, राशन केंद्रों ने राशन के स्टॉक की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पीएम आवास योजना का के प्रगति की स्थिति की समीक्षा करते हुए योजना में कोई भी गड़बड़ी अथवा फर्जीवाड़ा पाए जाने पर तात्कल कार्यवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत जिले में किए जा रहे स्वच्छता कार्यक्रम, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालय निर्माण , अपशिष्ट प्रबंधन एवं जागरूकता के संबंध में जानकारी प्राप्त की । मनरेगा के कार्यों की समीक्षा करते हुए जनपदवार मानव दिवस कार्यसृजन और मजदूरी भुगतान की जानकारी प्राप्त कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में राजस्व विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, कृषि विभाग, खेल विभाग, पीडब्ल्यू विभाग, शिक्षा विभाग सहित अलग-अलग विभागीय योजनाओं की भी समीक्षा की। साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजनांतर्गत स्वसहायता समूह सदस्यों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर विधायक प्रेमनगर श्री भूलन सिंह मरावी, कलेक्टर श्री एस जयवर्धन, डीएफओ श्री पंकज कमल, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती कमलेश नंदिनी साहू, अपर कलेक्टर श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, सयुक्त कलेक्टर श्री नरेंद्र पैकरा, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती शिवानी जायसवाल एवं सर्व जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव-2024
एक मंच पर दिखी विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों की अनूठी झलक
देश भर से आए नर्तक दलों ने बिखेरी आदिवासी लोक नृत्यों की छटा
राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव में विभिन्न राज्यों से आए लोक नर्तक दलों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर सिक्किम, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़, नागालैण्ड, उत्तरांचल, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, दमन दीव, गुजरात और राजस्थान के जनजातीय समूह ने पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।
लोक नृत्य महोत्सव में पहली सांस्कृतिक प्रस्तुति छत्तीसगढ़ के माड़िया जनजाति ने गौर माड़िया नृत्य के माध्यम से दी। गौर माड़िया नृत्य छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग में गौर माड़िया जनजाति द्वारा किया जाता है। इस जनजाति का यह नृत्य बहुत ही हर्षाेल्लास से परिपूर्ण, सजीव एवं सशक्त होता है। सिक्किम के लिम्बू जनजाति समुदाय के लोक नर्तक दल ने प्रकृति पूजा, फसल और प्राणियों के संरक्षण में किए जाने वाला नृत्य चासोक तांगनाम नृत्य प्रस्तुत किया। गुजरात से आए लोकनर्तक दल ने सिद्दी गोमा नृत्य और राठवा नृत्य की प्रस्तुति दी। अरुणाचल प्रदेश से आए नर्तक समूह ने गेह पदम ए ना-न्यी की प्रस्तुति दी।
इसके उपरांत मध्यप्रदेश के डिंडौरी से आए गोंड जनजाति समूह ने सैला-रीना नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। सैला-रीना नृत्य एवं गीत बहु जनजातीय नृत्य है। जम्मू कश्मीर के गुज्जर जनजातीय समुदाय के नर्तक दल ने मनमोहक गोजरी नृत्य की प्रस्तुति से खूब तालियां बंटोरी। जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव के पहले दिन उत्तराखंड के जनजातीय समुदाय द्वारा दिया बाती नृत्य, तेलंगाना के द्वारा मथुरी नृत्य, उत्तर प्रदेश के द्वारा कर्मा नृत्य, कर्नाटक के द्वारा सुगाली नृत्य , आंध्र प्रदेश के द्वारा ढीमसा नृत्य, दमन दीव द्वारा तारपा नृत्य तथा राजस्थान के जनजातीय कलाकारों द्वारा चकरी नृत्य की प्रस्तुति दी गई।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के जनजातीय कलाकारों द्वारा अलग-अलग तीज त्यौहारों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी गई।
साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव के पहले दिन कलाकारों के साथ ही उपस्थित दर्शकों में भी जबरदस्त उत्साह का माहौल था।दर्शकों ने विभिन्न प्रदेशों से आए जनजातीय कलाकारों के नृत्य पर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।